THE UNKNOWN TRUTH OF ANCIENT INDIA. कौरवो का जन्म कैसे हुआ ??
THE UNKNOWN TRUTH OF ANCIENT INDIA.
कौरवो का जन्म कैसे हुआ ??

नमस्कार दोस्तों,
दोस्तों में "अनुज राजपूत" एक फाइनेंसियल कंसलटेंट एंड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर हु। में कभी कभी अपने सब्जेक्ट से हटके भी कुछ लिखने का प्रयास करता हु। आज में कौरवो के जन्म के बारे में बता रहा हु। बहोत ही रहस्यमई ढंग से कौरवो का जन्म हुआ था। जब उनका जन्म हुआ था तो बहोत ही अशुभ संकेत दिखने लगे थे। अचानक पुरे हस्तिनापुर में डरावनी आवाजे आने लगी थी। कुछ बहोत बुरा होने वाला था। सारे ऋषि मुनि हस्तिनापुर से दूर चले गए। तो चलिए देखते हे।

हस्तिनापुर का राजा धृतराष्ट्र जन्म से ही नेत्रहीन थे। उसके जन्म में भी एक रहस्य था। मगर उनकी पत्नी गांधारी नेत्रहीन नहीं थी। उनकी पत्नी ने अपने विवाह के बाद अपनी आँखों पे पट्टी बांध के अपनी स्वेच्छा से नेत्रहीन हुई थी। धृतराष्ट्र बहोत ही महत्वकांशी थे। धृतराष्ट्र चाहते थे की उनके भाई पांडु से पहले उनको संतान हो जाए, क्योकि नई पीढ़ी का सबसे बड़ा पुत्र ही राजा बनता। उन्होंने गांधारी के साथ काफी प्रेमपूर्ण संबंध बनाये, ताकि किसी तरह वे उनको एक पुत्र दे सके। आखिरकार गांधारी गर्भवती हुई। मगर 11 महीने गुजरने के बावजूद कुछ हुआ नहीं। तब उनको चिंता होने लगी। तब पांडु को एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम युधिष्ठीर रखा गया। धृतराष्ट्र और गांधारी दोनों दुःख और निराशा में डूब गए।

चूँकि युधिष्ठीर का जन्म पहले हुआ था इसीलिए स्वाभाविक रूप से राजगद्दी पर उसी का अधिकार था। देखते देखते 12 महीने बीत गए मगर गांधारी को बच्चा नहीं हुआ। वो चिंता करने लगी और सोचने लगी के कही उसका बच्चा गर्भ में ही तो नहीं मर गया। या कोई और बात हे। हताशा में आकर उसने अपने पेट पे मुक्के मारे फिर अपनी दासी को छड़ी से पेट पे मारने को कहा। और ऐसा करने से उनका गर्भपात हो गया। और मॉस का एक काला लोथड़ा बाहर गिरा। सब लोग उस मॉस के लोथड़े को देख के डर गए, क्योकि वो कही से भी इंसानी मॉस के टुकड़े जैसा नहीं लग रहा था। वह कोई बहोत बुरी और अशुभ चीज लग रही थी। अचानक पूरा हस्तिनापुर डरावनी आवाजों से आतंकित होने लगा। इसका मतलब था की बहोत बुरा होने वाला था। सारे ऋषिमुनि हस्तिनापुर से दूर चले गए। तब विदुर ने आकर धृतराष्ट्र से कहा, ' हम सब बहोत बड़ी मुसीबत में पड़ने वाले हे।' धृतराष्ट्र संतान के लिए इतने उत्सुक थे की उन्होंने विदुर की बात को नकार दिया।
फिर गांधारी ने मुनि वेदव्यास को बुलाया। एक बार की बात हे। जब मुनि वेदव्यास एक लम्बी यात्रा करके वापस आये थे तब उनके पैर बहोत जख्मी हो गए थे और गांधारी ने ही उनकी बहोत सेवा की थी और उनके जख्मी पैरो पे मरहम पट्टी भी की थी। तब मुनि वेदव्यास गांधारी पे बहोत प्रसन्न हुए थे और गांधारी को वर मांगने को कहा। गांधारी ने सौ पुत्रो का आशीर्वाद माँगा। और मुनि ने उनको सौ पुत्र होने का आशीर्वाद दिया। अब गांधारी ने गर्भपात होने के बाद मुनि वेदव्यास को बुलाया और पूछा की 'अपने तो मुझे सौ पुत्र होने का आशीर्वाद दिया था फिर भी मेने मॉस के लोथड़े को जन्म दिया तो में अब क्या करू। इसे जंगल में फेक दीजिये।' मुनि वेदव्यास ने कहा 'मेरा आशीर्वाद गलत नहीं हो सकता, मेने सौ पुत्रो का आशीर्वाद दिया था तो आपको सौ पुत्र ही होंगे। ' मॉस का वही लोथड़ा जैसा भी हे उसे लेकर आओ। वह उसे तहखाने में लेकर गए। मुनि वेदव्यास ने 100 मिट्टी के घड़े और तिल का तेल, और बहोत सारी अलग अलग प्रकार की जड़ीबूटी भी मंगवाई। उन्होंने उस मॉस के लोथड़े के 100 टुकड़े किये और सबको अलग अलग घड़े में बंद करके तहखाने में रख दिया। फिर उन्होंने देखा की एक छोटा सा टुकड़ा रह गया हे। फिर उन्होंने एक और घड़ा मंगवाया और उसमे उस छोटे टुकड़े को बंद करके रख दिया, और गांधारी से कहा की तुम्हे 100 पुत्र होंगे और 1 पुत्री होगी। इस तरह से एक और साल बीत गया।

एक साल बाद, पहला घड़ा फुट गया और उससे एक विशाल बच्चा बाहर निकला। उसकी आंखे सांप की तरह झपक नहीं रही थी। वो स्थिर और सीधी थी। फिर से अशुभ संकेत आने लगे और डरावनी आवाजे आने लगी। धृतराष्ट्र को महसूस हुआ की कुछ गड़बड़ हे और उन्होंने विदुर से पूछा, की ये क्या हो रहा हे ? क्या मेरा बेटा पैदा हो गया हे ? विदुर बोले, हां, आपको पुत्र की प्राप्ति हुई हे। धीरे धीरे सारे घड़े फूटने लगे और सारे बेटे बाहर आने लगे। एक घड़े से एक नन्ही सी बच्ची भी निकली। विदुर ने धृतराष्ट्र को बताया की आपको सौ पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई हे। मगर में आपको एक सलाह देता हु की अपने बड़े बेटे को खत्म कर दीजिये। धृतराष्ट्र बोले, क्या, तुम मुझे अपने ज्येष्ठ पुत्र को मारने की सलाह दे रहे हो ? यह क्या बात हुई ? विदुर ने कहा, 'अगर आपने अपने ज्येष्ठ पुत्र को मरवा डाला, तो आप अपना, कुरु वंश और मानव जाती पर बहोत बड़ा उपकार करेंगे। आपके फिर भी सौ बच्चे रहेंगे, 99 पुत्र और 1 पुत्री। इस बड़े पुत्र के नहीं होने से आपके बाकि संतानो को भी कोई नुक्सान नहीं होगा। मगर वो जिन्दा रहा तो ये पूरी दुनिया का विनाश कर देगा। इस बिच, गांधारी ने अपने बड़े पुत्र को गोद में उठा लिया और उसे कोई भी अशुभ संकेत न सुनाई दिया और नहीं महसूस हुआ। विदुर ने कहा, बुद्धिमान लोगो ने हमेशा से कहा हे की परिवार के कल्याण के लिए किसी एक व्यक्ति का बलिदान, गांव के कल्याण के लिए किसी एक परिवार का बलिदान, और देश के कल्याण के लिए गांव का बलिदान किया जा सकता हे।
आपका ये बच्चा मानवता की आत्मा को खत्म करने के लिए पैदा हुआ हे। उसे अभी ख़तम कर दीजिये। में कसम खाके कहता हु की उसके भाइयो को कुछ नहीं होगा और आप अपने 99 पुत्रो के साथ आनंद से रह सकेंगे। मगर इसे जीवित नहीं छोड़ना चाहिए। लेकिन अपने सगे बेटे से धृतराष्ट्र के मोह ने उनकी बुद्धि ख़राब कर दी थी। फिर दुर्योधन अपने सौ भाई - बहन के साथ हस्तिनापुर महल में पला बढ़ा, जबकि पांडव जंगल में पले बढे।
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